भूतपिपरिया में आखिरी सफर भी कीचड़ में... डेढ़ किमी तक कंधों पर रही अर्थी, सिस्टम मौन


 जिले में विकास के दावे फाइलों में कैद, गांव की हकीकत ने फिर किया शर्मसार - बारिश में मुक्तिधाम का रास्ता बना दलदल, वीडियो वायरल के बाद भी जिम्मेदारों की चुप्पी



*चीफ रिपोर्टर, नरसिंहपुर।*

कहते हैं आखिरी सफर तो कम से कम सम्मानजनक होना चाहिए। लेकिन नरसिंहपुर जिले के भूतपिपरिया गांव में इंसान को जीते जी तो छोड़िए, मरने के बाद भी सम्मान नसीब नहीं हो रहा। 

चावरपाठा जनपद की ग्राम पंचायत बांसखेड़ा के ग्राम भूतपिपरिया से एक झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे सरकारी सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहां एक दिवंगत की अर्थी को मुक्तिधाम तक ले जाने के लिए ग्रामीणों को डेढ़ किलोमीटर तक घुटने-भर कीचड़ और दलदल में पैदल चलना पड़ा। कंधे पर सिर्फ अर्थी नहीं थी, कंधे पर थी व्यवस्था की नाकामी, पंचायत के वादों की शवयात्रा।

गुरुवार को इस हृदय विदारक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो हर देखने वाले की आंखें नम हो गईं। तस्वीरों में साफ दिख रहा है - आगे एक मासूम बच्चा हाथ में मटकी लिए कीचड़ में फिसलता-संभलता चल रहा है, पीछे 4 कंधों पर अर्थी और उसके पीछे बेबस ग्रामीणों का काफिला। यह कीचड़ नहीं, विकास के दावों की चिता थी।

ग्रामीणों ने बताया कि यह कोई एक दिन की कहानी नहीं है। बारिश आते ही मुक्तिधाम जाने वाला यह एकमात्र रास्ता दलदल में बदल जाता है। महीनों से, सालों से वे मुक्तिधाम तक पक्की सड़क के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, जनसुनवाई में आवेदन दे-देकर थक चुके हैं। पर फाइलें आज भी टेबल से नहीं हिलीं।

सवाल बड़ा है - जब इंसान की अंतिम विदाई का रास्ता भी सरकार नहीं बना पा रही, तो जीवित लोगों के विकास के दावे कितने खोखले हैं? जिले में लगातार सामने आ रही ऐसी तस्वीरें बता रही हैं कि पंचायत और ग्रामीण विकास सिर्फ कागजों पर दौड़ रहा है, जमीन पर तो आज भी लोग कीचड़ में ही दौड़ रहे हैं।


अब देखना यह है कि इस मार्मिक वीडियो के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटती है या अगली अर्थी तक फिर इसी कीचड़ भरे इंतजार में गांव रहेगा।

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