नर्मदा सेवी, विशेषज्ञ एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि एक मंच पर आए
चार प्रमुख विषयों पर बनेगी कार्ययोजना
नरसिंहपुर|मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद एवं नर्मदा समग्र के संयुक्त तत्वाधान में राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त मध्यप्रदेशजनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष एवं पद्मश्री मोहन नागर के मुख्य आतिथ्य में नर्मदा-रेवा सेवा समागम के अंतर्गत नर्मदा नदी के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन कलेक्ट्रेट सभाकक्ष नरसिंहपुर में रविवार को सम्पन्न हुआ।
कार्यशाला में नर्मदा समग्र के सचिव एवं मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद के सलाहकार करण कौशिक, संभाग समन्वयक अमिताभ श्रीवास्तव, नर्मदा समग्र के सदस्य विनोद शर्मा सहित नर्मदा संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय नर्मदा सेवी, विषय विशेषज्ञ एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
चार प्रमुख विषयों पर केंद्रित होगी कार्ययोजना
श्री नागर ने कहा कि नर्मदा संरक्षण एवं सेवा के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न संगठनों, संस्थाओं और नर्मदा सेवियों को साझा मंच पर लाकर संगठित, समन्वित एवं दीर्घकालीन कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि 26 अगस्त को आयोजित होने वाली मध्यभारत प्रांत की बैठक के संदर्भ में चार प्रमुख विषयों पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इनमें नर्मदा जलग्रहण क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक कृषि को बढ़ावा देना, नर्मदा एवं उसकी सहायक नदियों का संरक्षण एवं संवर्धन, नर्मदा पथ एवं परिक्रमावासियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं तथा घाट संस्कृति का संरक्षण, घाटों की स्वच्छता एवं संवर्धन प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में अनेक नर्मदा सेवी मिल-जुलकर कार्य करते थे, लेकिन समय के साथ विभिन्न समूह अपने-अपने स्तर पर कार्य करने लगे। अब आवश्यकता है कि सभी नर्मदा सेवी एक मंच पर आकर स्पष्ट जिम्मेदारियों एवं निर्धारित करणीय कार्यों के साथ आगे बढ़ें।
नर्मदा परिक्रमावासियों के लिए सुविधाओं में सुधार आवश्यक
श्री नागर ने कहा कि नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नर्मदा पथ पर परिक्रमावासियों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं में विस्तार के साथ उनकी गुणवत्ता में भी सुधार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समाज की सक्रिय सहभागिता और स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं का संचालन इस दिशा में अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।
नर्मदा एवं उसकी सहायक नदियों के संरक्षण पर चर्चा के दौरान कहा गया कि छोटी-छोटी जलधाराएं, पहाड़ी स्रोत और सहायक नदियां मिलकर नर्मदा के प्रवाह को समृद्ध करती हैं। इसलिए नर्मदा संरक्षण का प्रयास केवल मुख्य नदी तक सीमित न होकर उद्गम से संगम तक संपूर्ण नदी तंत्र के संरक्षण पर केंद्रित होना चाहिए। लगभग 65 नदियों के उद्गम स्थलों तक पहुंचकर स्थिति का अवलोकन किए जाने का उल्लेख करते हुए सभी उद्गम स्थलों को व्यवस्थित रूप से चिन्हित कर उनके संरक्षण की योजना बनाने की आवश्यकता बताई गई। लक्ष्य यह हो कि नदियां अपने उद्गम से निरंतर प्रवाहित रहें और उनका जल निर्मल एवं स्वच्छ बना रहे।
जल के साथ वृक्ष संरक्षण भी जरूरी
कार्यशाला में जल एवं वृक्षों के परस्पर संबंध को रेखांकित करते हुए कहा गया कि जल संरक्षण के साथ वृक्ष संरक्षण एवं वृक्षारोपण को भी अभियान का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। विशेषकर पहाड़ी एवं जलग्रहण क्षेत्रों में वृक्षों का संरक्षण जल स्रोतों और नदियों के दीर्घकालीन संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है। धार्मिक यात्राओं एवं परंपराओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर जनभागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
प्राकृतिक एवं जैविक कृषि को बढ़ावा देने पर जोर
नर्मदा जलग्रहण क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक कृषि विषय पर जैविक कृषक एवं विषय विशेषज्ञ रविशंकर रजक ने प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों एवं कृषि रसायनों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी, भूजल, जलस्रोतों एवं नदियों पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों की जानकारी दी। कार्यशाला में किसानों के साथ छोटी-छोटी संगोष्ठियों, संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से प्राकृतिक एवं जैविक खेती के लाभों को पहुंचाने की आवश्यकता बताई गई।
घाट संस्कृति और स्वच्छता पर विशेष जोर
कार्यशाला में घाट संस्कृति एवं घाट संरक्षण विषय पर विनोद शर्मा ने विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को मां नर्मदा के प्रत्यक्ष दर्शन मुख्य रूप से घाटों पर ही होते हैं। घाटों के आसपास मंदिर, मठ एवं अन्य धार्मिक स्थल होने के कारण इनकी स्वच्छता, पवित्रता और सांस्कृतिक गरिमा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। घाटों एवं पुलों के आसपास गंदगी की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए जन-जागरूकता के साथ ‘रोको-टोको अभियान’ चलाने पर जोर दिया गया। कपड़े, प्लास्टिक एवं पूजन सामग्री नदी अथवा घाटों पर छोड़ने की प्रवृत्ति रोकने तथा पर्यावरण-अनुकूल धार्मिक परंपराओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। बैठक में बताया गया कि नर्मदा सेवा की दिशा में जिले के सभी 51 घाटों पर स्वच्छता एवं आरती का कार्य प्रारंभ हो चुका है।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को विभिन्न समूहों में विभाजित कर चारों प्रमुख विषयों पर समूह कार्य कराया गया। प्रत्येक समूह ने अपने विषय से संबंधित समस्याओं, संभावित समाधानों एवं प्रस्तावित कार्ययोजना पर चर्चा कर उसका प्रस्तुतीकरण किया। समापन सत्र में संस्कार केंद्रों एवं उनके संचालन सहित विभिन्न विषयों पर अमिताभ श्रीवास्तव ने मार्गदर्शन दिया। वहीं श्री करण कौशिक ने कार्यशाला में चिन्हित विषयों पर स्पष्ट एवं परिणामोन्मुख करणीय कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री जयनारायण शर्मा ने जिले में किए गए सर्वेक्षण एवं नर्मदा नदी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों का पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण दिया।
कार्यशाला का प्रमुख निष्कर्ष रहा कि नर्मदा संरक्षण के लिए केवल विचार-विमर्श पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक कार्य के लिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या करना है, कौन करेगा, कब करेगा और उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। इसी आधार पर कार्ययोजना को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। नर्मदा संरक्षण एवं जल संवर्धन के क्षेत्र में निस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं एवं समाजसेवियों को सम्मानित कर उनके कार्यों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता भी व्यक्त की गई, ताकि समाज के अन्य लोग भी नर्मदा सेवा से जुड़ने के लिए प्रेरित हों। कार्यशाला में जिला निगरानी समिति सदस्य लक्ष्मीकांत धाकड़, बाल कल्याण समिति नरसिंहपुर के अध्यक्ष शिवकुमार रैकवार, विषय विशेषज्ञ संदीप नेमा, नर्मदा समग्र विभाग संयोजक जबलपुर सुधीर अग्रवाल सहित अन्य नर्मदा सेवी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला समन्वयक जयनारायण शर्मा ने किया तथा आभार प्रदर्शन श्री प्रतीक कुमार दुबे ने किया। कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि नर्मदा संरक्षण किसी एक संस्था या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज, संत समाज, प्रशासन, किसान, नर्मदा सेवी, स्थानीय समुदाय एवं श्रद्धालुओं के संयुक्त प्रयास का विषय है। सामूहिक सहभागिता, स्पष्ट जिम्मेदारी और निरंतर प्रयासों के माध्यम से मां नर्मदा के उद्गम से संगम तक संरक्षण एवं संवर्धन के व्यापक संकल्प को साकार किया जाएगा।

