भोपाल/नरसिंहपुर - मध्यप्रदेश के लिए गर्व का क्षण। नर्मदा के रेतीले किनारों पर उगने वाले प्रसिद्ध बरमान घाट के विशाल बैंगन को आखिरकार GI Tag मिल गया है। इसे आम भाषा में बरमान का भटा भी कहा जाता है।
प्रदेश के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के प्रयासों और स्थानीय किसानों की वर्षों की मेहनत के बाद चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री ने इसे प्रमाण पत्र जारी किया है। इसके साथ ही नरसिंहपुर के गुड़ को भी GI टैग प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की तारीफ
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर नरसिंहपुर जिले के किसानों और उद्यानिकी विभाग को बधाई दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा -
"बरमान घाट का विशाल बैंगन मध्यप्रदेश की विशिष्ट पहचान है। नर्मदा की गोद में पैदा होने वाला यह भटा अपने बड़े आकार और अनूठे स्वाद के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। GI टैग मिलना हमारे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे हमारे अन्नदाता किसानों की आय बढ़ेगी और यह उत्पाद अब दुनिया के बाजार तक पहुंचेगा।"
क्या है खास बरमान के भटे में -
1. नर्मदा के तट की किस्म: यह केवल नर्मदा नदी के सतधारा, धरमपुरी, बरमान, रामघाट और केसली घाट तक करीब 1000 हेक्टेयर के रेतीले-कछारी क्षेत्र में उगता है।
2. विशाल आकार: एक बैंगन का वजन 3 किलो का होता है। इसीलिए इसे विशाल बैंगन कहा जाता है।
3. अनूठा स्वाद: इसमें बीज बहुत महीन होते हैं, रेशा बिल्कुल नहीं होता और पानी की मात्रा 85-89% होती है, जिससे इसका स्वाद औरों से अलग होता है।
4. दशकों पुराना बीज: किसान हर साल बड़ी फसल में से अच्छे फल छोड़कर खुद बीज तैयार करते हैं। खास बात यह है कि इसी बीज को दूसरी जगह लगाने पर वैसा स्वाद नहीं आता जैसा नर्मदा की मिट्टी में आता है।
