वन्दे मातरम गैर-इस्लामिक नहीं, इस्लाम सिखाता है देशभक्ति!



राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता माननीय इन्द्रेश कुमार जी का एक बेहद महत्वपूर्ण और आंखें खोलने वाला संदेश। उन्होंने स्पष्ट किया है कि 'वन्दे मातरम' कहना किसी भी तरह से गैर-इस्लामिक नहीं है। 

मुख्य बातें जो हमें समझनी चाहिए:

वतन से मोहब्बत ईमान का हिस्सा है:** इस्लाम खुद अपने मानने वालों को अपनी मातृभूमि से वफादारी और देशभक्ति का पाठ पढ़ाता है। जिस जमीन का हम अन्न खाते हैं, जहाँ हम रहते हैं, उसके प्रति सम्मान व्यक्त करना हर नागरिक का कर्तव्य है।

 सच्ची देशभक्ति:* देश की मिट्टी का सम्मान करना और 'वन्दे मातरम' (मातृभूमि को नमन) कहना किसी भी धर्म की मान्यताओं के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के प्रति हमारी कृतज्ञता को दर्शाता है।

एकता का संदेश:** धर्म हमें बांटता नहीं, बल्कि जोड़ता है। आइए, मजहबी दीवारों को तोड़कर देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को मजबूत करें। 

राष्ट्र सर्वोपरि है। आइए मिलकर एक सशक्त और अखंड भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

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