7.21 करोड़ के वक्फ जमीन घोटाले में तीन आरोपियों को जमानत, 84 वर्षीय नवाब भी शामिल


विदिशा। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम विदिशा श्री मनोज कुमार शर्मा की अदालत ने 11 साल पुराने चर्चित वक्फ जमीन अदला-बदली घोटाले में तीन आरोपियों की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने प्रत्येक आरोपी को एक-एक लाख रुपये के मुचलके पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।



मामला आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) भोपाल के अपराध क्रमांक 41/2014 से जुड़ा है। आरोपियों में तत्कालीन कार्यपालन अधिकारी म.प्र. वक्फ बोर्ड दाऊद अहमद खान (66) निवासी भोपाल, कुरवाई रियासत के मुतवल्ली नवाब जफर अली खान (84) और उनके दामाद मुईनुद्दीन बिजली खान शामिल हैं।




*क्या है पूरा मामला?*

शिकायत के अनुसार वर्ष 1963 में कुरवाई नवाब परिवार द्वारा इस्लामिया मदरसा के लिए वक्फ की गई थी। वर्ष 2009 में मुतवल्ली जफर अली खान ने वक्फ बोर्ड को आवेदन देकर किले के पास स्थित वक्फ की 4.633 हेक्टेयर कीमती जमीन के बदले बेतवा नदी किनारे स्थित अपनी निजी 6.280 हेक्टेयर जमीन देने का प्रस्ताव रखा था।

ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष और तत्कालीन सीईओ दाऊद अहमद खान ने संचालक मंडल की अनुमति के बिना ही 18 जून 2010 को इस अदला-बदली को मंजूरी दे दी। प्राइवेट वैल्युअर की रिपोर्ट में वक्फ की जमीन का मूल्य 56.05 लाख बताया गया, जबकि उप पंजीयक कुरवाई की रिपोर्ट में उसी जमीन का मूल्य 7 करोड़ 77 लाख 92 हजार आंका गया। इस तरह वक्फ बोर्ड को 7 करोड़ 21 लाख 86 हजार रुपये की आर्थिक हानि का आरोप है।

इसी जांच के आधार पर ईओडब्ल्यू ने 2014 में धारा 420, 120-बी भादवि एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी), 13(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया था।


*कोर्ट ने क्या कहा?*

बचाव पक्ष के अधिवक्ता संतोष शर्मा ने तर्क दिया कि कोई नकद लेन-देन नहीं हुआ, आरोपी प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं और 11 साल की विवेचना में कभी गिरफ्तार नहीं किए गए। वहीं विशेष लोक अभियोजक निशांत अग्रवाल ने जमानत का विरोध किया।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि विवेचना पूर्ण हो चुकी है, अपराध मृत्यु दंड या आजीवन कारावास से दंडनीय नहीं है, आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और विचारण में समय लगेगा। इसलिए गुण-दोष पर बिना टिप्पणी किए जमानत दी जाती है।

कोर्ट ने चार शर्तें लगाई हैं - नियमित पेशी पर उपस्थित रहना, गवाहों को प्रभावित न करना, अपराध की पुनरावृत्ति न करना और बिना अनुमति भारत न छोड़ना।

अब इस मामले का विचारण विशेष ईओडब्ल्यू प्रकरण क्रमांक 01/2025 में चलेगा।

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