नरसिंहपुर केसरी |करेली. गौमाता के नाम पर आरक्षित शासकीय चरनोई भूमि को पट्टे पर देने के नगरपालिका के प्रस्ताव के खिलाफ मंगलवार को गौप्रेमियों ने मोर्चा खोल दिया। भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के मानद पशु कल्याण प्रतिनिधि और जीसीसीआई के प्रदेश मीडिया प्रभारी भागीरथ तिवारी के नेतृत्व में एक ज्ञापन मुख्य नगरपालिका अधिकारी, करेली को सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया कि बुधवार 5 अगस्त को नगरपालिका परिषद की विशेष बैठक बुलाई गई है। बैठक के *एजेंडा क्रमांक 3* में करेली की चरनोई भूमि यानी छोटी घास वाली शासकीय भूमि को पट्टे पर दिए जाने का प्रस्ताव है।
"33 कोटि देवताओं का वास, चरनोई बेची तो सड़क पर उतरेंगे"
ज्ञापन सौंपने वालों में सरपंच इंद्रेश यादव, यश राजपूत सहित कई गौभक्त शामिल थे। उन्होंने कहा:
> "गौमाता के शरीर में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। चरनोई, गौठान और चरागाह की जमीनें गौवंश के जीवन का आधार हैं। यदि इन जमीनों को संरक्षित नहीं किया गया और पट्टे पर दे दिया गया, तो हम सब आंदोलन और आमरण अनशन के लिए बाध्य होंगे। इसकी पूरी जवाबदारी नगर प्रशासन और परिषद की होगी।"
गौप्रेमियों ने मांग की कि करेली क्षेत्र की चरनोई भूमि को किसी भी हालत में पट्टे पर न दिया जाए, बल्कि उसे गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए सुरक्षित किया जाए।
अधिकारियों को भेजी प्रतिलिपि
ज्ञापन की प्रतिलिपि निम्न को भी भेजी गई है:
*अध्यक्ष-सचिव, भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी, जीसीआई राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई, माननीय राज्यपाल, माननीय मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश* सहित संबंधित विभागों के अधिकारी।
सवाल अब ये है
एक ओर सरकार "गौठान" और "गौ-संरक्षण" की बात करती है, वहीं दूसरी ओर नगरों में चरनोई जैसी जमीनें पट्टे पर देने के प्रस्ताव आ रहे हैं। करेली की इस चरनोई का क्या होगा? क्या गौमाता के लिए बची आखिरी घास की जमीन भी कागजों में बिक जाएगी?
गौभक्तों का कहना साफ है - *"पहले चरनोई बचाओ, फिर गौमाता बचाओ"*।
अब सबकी नजरें बुधवार की परिषद बैठक और प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं।

