_6 अगस्त 2026, गुरुवार_
बालाघाट की मस्जिदों में 3 दिवसीय कार्यक्रम, 8 अगस्त को होगी कुल की फातिया_
*बालाघाट*। पूरी दुनिया को इस्लाम धर्म की सूफी विचारधारा की पहचान कराने वाले विश्व प्रसिद्ध धर्मगुरु और महान सूफी संत *इमाम अहमद रजा खान आला हज़रत* का 108 वां सालाना उर्स आज 6 अगस्त से शुरू हो रहा है। इसका समापन 8 अगस्त को कुल की फातिया के साथ होगा।
अहले सुन्नत के मुख्यालय बरेली शरीफ से तारीख का ऐलान होने के बाद आज भारत के ग्रैंड मुफ्ती *असजद रजा खान कादरी* द्वारा परचम कुशाई के साथ उर्स के कार्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी।
*बालाघाट में इस तरह होंगे आयोजन*
बालाघाट मुख्यालय की जामा मस्जिद सहित शहर की अन्य मस्जिदों और मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में 3 दिवसीय धार्मिक आयोजन होंगे।
रजा एक्शन कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष *हाजी शोएब खान* ने बताया कि उर्स के अवसर पर कुरान खानी, मिलाद खानी, दरूद की महफिल और आला हज़रत की जीवनी पर तकरीरें आयोजित की जाएंगी।
8 अगस्त शनिवार को दोपहर 2.38 बजे कुल की विशेष फातिया के साथ लंगर का भी आयोजन किया जाएगा।
*आला हज़रत का योगदान*
हाजी शोएब खान ने बताया कि आला हज़रत इमाम अहमद रजा खान का जन्म 1856 में बरेली शरीफ में हुआ था। उस समय अंग्रेजों के दौर में उन्होंने अपने इल्म और शिक्षा से इस्लाम की सच्चाई को लोगों के सामने रखा। उन्होंने "हुस्सामुलहरमैन", "फतावा रजविया" सहित 1300 से अधिक किताबें लिखीं और कुरआन का अनुवाद "कंजुल ईमान" के रूप में देकर पूरी दुनिया को अल्लाह और रसूल की पहचान कराई।
17 दिसंबर 1920 को उन्होंने "जमात रजा-ए-मुस्तफा" नाम से संगठन का गठन किया था, जिसका उद्देश्य समाज को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना था।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आज जरूरत है कि हम सभी आला हज़रत के मानने वाले बरेली शरीफ से जुड़कर सामाजिक प्रगति के लिए कार्य करें।
